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शुक्रवार, 22 मार्च 2013

२३ मार्च से असहयोग आन्दोलन

२३ मार्च से असहयोग आन्दोलन

दिल्ली में बिजली-पानी के नाजायज़ रूप से बढ़े बिलों के खिलाफ, जनता को एकजुट करने के लिए असहयोग आन्दोलन और उपवास

बिजली और पानी के नाजायज़ बिलों से दिल्ली के आम आदमी की ज़िन्दगी हलकान है. यह बिल बढ़ने का एक ही कारण है – भ्रष्टाचार. दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित जी बिजली-पानी कंपनियों से मिली हुई हैं. वे जनता के हितों को बेचकर, बार बार बिजली पानी के दाम बढ़ा रही हैं. दूसरी तरफ भाजपा चुप है या फिर विरोध का नाटक करती है. आज यह सबको पता है कि २०१० में डीईआरसी के तत्कालीन चेयरमैन बरजिंदर सिंह ने बिजली के दाम कम करने का आदेश तैयार किया था, लेकिन शीला दीक्षित जी ने इसे रुकवा दिया था. उस आदेश की प्रति दो साल से दिल्ली के बीजेपी नेताओं के पास थी लेकिन उनके विधायकों ने दो साल में एक बार भी इसे विधानसभा में नहीं उठाया. आज वो चुनाव के पहले विरोध का नाटक कर रहे हैं. दोनों पार्टियां बिजली-पानी कंपनियों से मिली हुई हैं. शीला जी ने दिल्ली में बिजली के दाम और बढ़ाने का निर्णय कर लिया है. उनका कहना है कि बिजली कंपनियों को २० हज़ार करोड़ का घाटा हुआ है. दिल्ली में ३५ लाख बिजली कनेक्शन हैं, अगर यह २० हज़ार करोड़ रुपया लोगों से वसूला गया तो औसतन हर परिवार को ५०००/- रूपए महीना अतरिक्त देने पड़ेंगे. आने वाले कुछ महीनों में दिल्ली में नाटक खेला जाएगा कि डीईआरसी बिजली के दाम बढ़ाएगा, शीला दीक्षित चुनाव के पहले सब्सिडी देकर बिल कम करने का नाटक करेंगी, और भाजपा विरोध का नाटक करेगी. जनता पिसती रहेगी.

आज भी बहुत से लोगों तो ये महंगे बिल भरने के लिए क़र्ज़ लेना पड़ रहा है. एक आम आदमी भला कब तक क़र्ज़ लेकर इन बिलों को भर सकता है? यहीं पर हमें महात्मा गांधी का बताया रास्ता नज़र आता है. वे कहते थे कि – “जो अन्यायपूर्ण कानून हो, उसका पालन मत करो. उसके बदले में सरकार जो सज़ा दे तो वह भी भुगतने को तैयार रहो.”

गांधी जी के बताए रास्ते के मुताबिक़, लोगों को अपने बिजली पानी के नाजायज़ बिल देना बंद कर देना चाहिए. लोग बिजली पानी के बिलों से दुखी तो हैं, वह भी चाहते हैं कि बिल कम हों लेकिन अपने बिल रोकने का साहस नहीं कर पा रहे हैं. उन्हें डर लग रहा है कि बिल रोकने से अगर उनकी बिजली – पानी कट गई तो क्या होगा? गांधी जी के बताये असहयोग के रास्ते पर चलने में उन्हें डर लगता है कि अगर उनकी आवाज़ अकेली रह गई तो?

लोगों के अन्दर के इस डर को निकालने के लिए और उनकी आवाज़ को एक सुर में मिलाने के लिए अरविंद केजरीवाल २३ मार्च से उपवास शुरू कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोग इन नाजायज़ बिलों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाएं. अगर बड़ी संख्या में दिल्ली के लोगों ने बिजली पानी के बिल भरने बंद कर दिए, तो बिजली कम्पनियों और सरकार की हिम्मत नहीं होगी कि उनके खिलाफ कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई कर सके. फिर भी अगर कुछ लोगों के बिजली पानी कनेक्शन कटते हैं तो हमारी जनता से अपील है वो उसे खुद ही जोड़ लें. अगर उनके खिलाफ केस बनाया जाता है तो डरने की ज़रूरत नहीं है. जब नवम्बर में आम आदमी की सरकार बनेगी तो इस किस्म के सारे केस वापस ले लिए जायेंगे.

२३ मार्च से अरविन्द केजरीवाल सुन्दर नगरी (F-1/45, गगन सिनेमा हॉल के सामने, एसडीएम ऑफिस के पास, शनि बाज़ार, सुंदर नगरी, नन्द नगरी दिल्ली-९३) में एक घर में उपवास पर बैठेंगे लेकिन पूरी दिल्ली में सभी नगर निगम वार्ड्स में स्थानीय साथी अपने अपने इलाके में धरना देंगे और घर घर जाकर इस मुद्दे पर लोगों से बात करेंगे और उन्हें इस असहयोग आन्दोलन में शामिल होने की अपील करेंगे. इसके तहत दिल्ली के आम नागरिकों से मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के नाम एक चिट्ठी भी हस्ताक्षर कराई जायेगी.
 

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